Wednesday, April 10, 2019

चुनाव आयोग ने मोदी की बायोपिक की रिलीज पर रोक लगाई

नई दिल्ली. चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक 'पीएम नरेंद्र मोदी' की रिलीज पर रोक लगा दी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस फिल्म की रिलीज रोकने से जुड़ी याचिका रद्द कर दी। चुनाव आयोग ने कहा कि कुछ पार्टियों ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के तहत ऐसी फिल्मों की शिकायत की थी, जिनसे किसी राजनेता या राजनीतिक पार्टी की छवि पर असर पड़ता।

आयोग ने कहा, इनमें एनटीआर लक्ष्मी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्यमा सिंहम नाम की फिल्में शामिल हैं। इन्हें रचनात्मक कंटेंट कहा गया। लेकिन ऐसा भी कहा गया है कि इनसे सभी उम्मीदवारों और पार्टियों को बराबरी नहीं मिलेगी, जो कि आचार संहिता का उल्लंघन है। इसलिए आचार संहिता के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सिनेमा में इन फिल्मों का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए।

फिल्म के गाने का भाजपा के चुनाव प्रचार में हो रहा इस्तेमाल- याचिकाकर्ता

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था- इस फिल्म का एक गाना भाजपा के चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रेलर में कुछ ऐसे शॉट्स हैं जो वोटरों को प्रभावित करते हैं। इसमें चौकीदार कैंपेन को भी दिखाया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- दो मिनट के ट्रेलर से तय नहीं किया जा सकता कि यह वोटर्स को प्रभावित कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर छोड़ा था फैसला

शीर्ष अदालत ने कहा था- सेंसर बोर्ड ने अब तक इसे सर्टिफिकेट नहीं दिया है। फिल्म देखना उसका काम है। अगर इससे लोकसभा चुनाव में कोई दिक्कत है, तो चुनाव आयोग इस पर फैसला करेगा। पहले इस फिल्म की रिलीज 5 अप्रैल तय की गई थी, लेकिन विवाद के बाद इसे 11 तारीख तक बढ़ा दिया गया था। इस फिल्म में विवेक ओबेराय ने मोदी का किरदार निभाया है।

सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहे राहुल- रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई। सीतारमण ने बताया, कांग्रेस ने कहा- चौकीदार ने चोरी की है। राहुल ने कहा कि कोर्ट ने मान लिया है कि नरेंद्र मोदी ने अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ दिए। मैं सवाल उठाना चाहती हूं कि हम सब जानते हैं कि राहुल गांधी कभी आधा पैराग्राफ नहीं पढ़ते और सिर्फ वही समझते हैं जो उन्हें बताया जाता है। कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा था। जो पार्टी इतने सालों तक सत्ता में रही अब वह कोर्ट के बयानों को भी गलत तरह से पेश कर रही। राहुल अपने बयानों को कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं।

केंद्र की दलील थी- दस्तावेज एक्ट के तहत सुरक्षित, आरटीआई के दायरे से बाहर
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने कहा था- जब हम केंद्र की आरंभिक आपत्ति पर फैसला कर लेंगे, तभी हम पुनर्विचार याचिकाओं के दूसरे पहलुओं पर विचार करेंगे। स्पष्ट कर दें कि हम केवल तभी दूसरी जानकारियों पर जाएंगे, जब हम केंद्र की आपत्ति को खारिज कर दें। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि कोई भी इन दस्तावेजों को बिना संबंधित विभाग की इजाजत के अदालत में पेश नहीं कर सकता। यह दस्तावेज ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत सुरक्षित रखे गए हैं और सेक्शन 8(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार के दायरे से भी बाहर हैं।

भूषण ने केंद्र की दलील पर आपत्ति जताई थी
पुनर्विचार याचिका के पक्ष में भूषण ने दलील दी थी- केंद्र की आपत्ति के संबंध में दलील बेहद अपुष्ट और दुर्भावनापूर्ण है। सरकार ऐसे दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा नहीं कर सकती है, जो पहले से ही प्रकाशित हो चुके हों और सामने आ चुके हों। धारा 123 के तहत केवल वही दस्तावेज सुरक्षित माने जाते हैं, जिनका प्रकाशन ना किया गया हो।

मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी इस्तेमाल की गई- वेणुगोपाल
इससे पहले वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा था- जिन दस्तावेजों के आधार पर यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण जांच की मांग करने वाली याचिकाओं को रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे थे, वह तीन मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी थी। यह बयान उन्होंने उस खबर के संंबंध में कहा था, जिनमें दस्तावेजोंके चोरी होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा था- विपक्ष यह दावा कर रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्रालय से दस्तावेजों के चोरी होने की बात कही गई, यह पूरी तरह गलत है। मैं यह कहना चाहता था कि याचिकाकर्ताओं ने मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपियों का इस्तेमाल किया था और यह दस्तावेज बेहद गोपनीय थे।

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