中共罕见高规格悼念最高人民法院前院长,中国司法领域改革人物肖扬,盛赞其89年“六四“期间“立场坚定,旗帜鲜明”。
肖扬19日在北京去世,享年81岁。 周一(4月22日),习近平、李克强等七名政治局常委和副主席王岐山前往八宝山革命公墓送别。
肖扬在1998年至2008年担任中国最高人民法院院长和首席大法官,他在主政期间推行法官职业化改革和更严格的死刑核准制度,被誉为中国的“改革院长”。
官方媒体在报道中点明,在肖扬病重期间和逝世后,前中国国家领导人江泽民、胡锦涛也表示了沉痛哀悼,并慰问其亲属。
虽然最高人民法院院长是中国最高级别的法官,但并非中共中央政治局成员,仅兼任中央委员。七名中共中央政治局常委同时参加追悼会,规格不同寻常。
在新华社周一发布的讣告中,官方赞扬肖扬倡导树立现代司法理念,将死刑案件核准权正式收归最高人民法院统一行使,加强法官职业化建设,并推动法院公开审判。
值得注意的是,官方还特别提及其在1989年学生运动中,“立场坚定,旗帜鲜明,采取有力措施,稳定了队伍,打击了各种严重刑事犯罪活动。“
曾在清华大学担任政治学讲师的独立学者吴强对BBC中文说,近几年,中共在党内高官的讣告中提及1989年民运并不常见,在今年”六四“事件将满30周年的特殊背景下主动提及,有很深的考量。
“肖扬是1979年后,提高中国最高法院地位的重要人物。高规格的纪念是对于司法系统内部专业官僚的一种安抚,但官方也想避免一些自由派知识分子借题发挥。”
1998年上任的肖扬是中共建政以来的第八位最高人民法院院长。2008年的"两会"上,时年70岁的他选择在家乡广东团发表了告别演说。
在演说中,他提到了中国法院的多项改革措施,包括死刑核准制度、执行制度、公开审判制度和未成年人审判制度等,这几乎涵盖了他上任以来所做的多项改革。
1990年,他从广东省人民检察院被调进京,出任最高人民检察院副检察长兼检察委员会委员。
1993年,肖扬出任司法部部长,成为李鹏的内阁成员。1998年3月,他当选最高人民法院院长,并在2003年3月获得连任。
“肖扬是中国司法系统内部一个很有公正心的官员,这是很少有的。”吴强说。他表示,在现任最高法院院长周强主政后,一些专业的学者型官员“受到清洗”、最高法院地位下降,民众对于最高法院的不满情绪有所增加。
“但他的副手黄松有和奚晓明都因为经济问题落马,肖扬在这方面很难说毫无干系,”吴强说。
收回死刑复核权
被视为是肖扬任内最大遗产的,是中国最高法院对死刑审核权的收回。中国法律允许死刑的存在,而死刑复核权是指对此类死刑案件,由有权的人民法院进行再次核准。
中国改革开放初期,法律对死刑案件的核准权进行严格控制,统一由最高法院进行。但后来随着社会治安恶化,判处死刑的案件急剧增多,中国当局遂在1980年代初下发文件,规定如果涉及一部分严重罪行,则不必报最高人民法院核准,交省一级的高级法院核准便可。
1983年,中国当局提出“严打”的概念,要求“从重从快”地严厉打击刑事犯罪分子活动,被告人的上诉期仅有3天。在这种情况下,一些本不构成死刑的罪犯被错误核准了死刑,产生大量错杀案件。
2005年10月,最高法院在肖扬主导下,发布《人民法院第二个五年改革纲要》,将死刑核准权统一收归最高人民法院。
法官职业化
肖扬在任内做出了另一项改革,是积极推进中国的法官职业化建设。
2002年,肖扬提出法官职业化建设是中国法院队伍建设的一条长期主线。2001年,中国全国人大常委会通过修改《法官法》,规定初任法官必须通过国家司法考试的方式选拔。除法院院长,其他法官均需要司法资格。
此前,中国长期实行以“政治合格”为主的选任法官的方式,掌握生杀予夺大权的法官群体被以与其他行政官吏相同的选拔模式选出。
2005年,最高人民法院在《人民法院第二个五年改革纲要》里,决定进一步推进人民法院工作人员的分类管理,制定法官、法官助理、书记员、执行员、司法警察、司法行政人员、司法技术人员等分类管理管理办法。
肖扬也曾大力支持法院公开审判。1998年,他在全国法院教育整顿工作会议上称,法院要自觉接受舆论监督,把宪法和法律规定的“公开审判”制度落到实处。
表示希望各类案件,除涉及国家机密、公民个人隐私、未成年人犯罪以及法律另有规定不予公开审理外,一律实行公开审理制度,不许实行“暗箱操作”。
在他的推进下,1998年,北京市第一中级人民法院规定凡年满18岁的公民可凭有效证件旁听公开审判。此后,多地试行电视实况直播庭审。
此外,肖扬主导了对法官审判时所用的“工具”和服饰的改革。在其批示下,最高法审判委员会决定从2002年起,各级法院法官审理案件过程中,使用和敲击法槌, 规定所有法官在出庭时都应穿法袍。
尽管肖扬的很多政策受到欢迎,但也有批评人士认为,肖扬一直推进审判独立,却始终未能触碰党对司法的绝对领导,这使其卸任后,很多改革偃旗息鼓,司法地方化长期得不到解决,甚至连“司法独立”也成为他的继任者口中的禁忌词语。
Tuesday, April 23, 2019
Wednesday, April 10, 2019
चुनाव आयोग ने मोदी की बायोपिक की रिलीज पर रोक लगाई
नई दिल्ली. चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक 'पीएम नरेंद्र मोदी' की रिलीज पर रोक लगा दी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस फिल्म की रिलीज रोकने से जुड़ी याचिका रद्द कर दी। चुनाव आयोग ने कहा कि कुछ पार्टियों ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के तहत ऐसी फिल्मों की शिकायत की थी, जिनसे किसी राजनेता या राजनीतिक पार्टी की छवि पर असर पड़ता।
आयोग ने कहा, इनमें एनटीआर लक्ष्मी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्यमा सिंहम नाम की फिल्में शामिल हैं। इन्हें रचनात्मक कंटेंट कहा गया। लेकिन ऐसा भी कहा गया है कि इनसे सभी उम्मीदवारों और पार्टियों को बराबरी नहीं मिलेगी, जो कि आचार संहिता का उल्लंघन है। इसलिए आचार संहिता के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सिनेमा में इन फिल्मों का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए।
फिल्म के गाने का भाजपा के चुनाव प्रचार में हो रहा इस्तेमाल- याचिकाकर्ता
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था- इस फिल्म का एक गाना भाजपा के चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रेलर में कुछ ऐसे शॉट्स हैं जो वोटरों को प्रभावित करते हैं। इसमें चौकीदार कैंपेन को भी दिखाया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- दो मिनट के ट्रेलर से तय नहीं किया जा सकता कि यह वोटर्स को प्रभावित कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर छोड़ा था फैसला
शीर्ष अदालत ने कहा था- सेंसर बोर्ड ने अब तक इसे सर्टिफिकेट नहीं दिया है। फिल्म देखना उसका काम है। अगर इससे लोकसभा चुनाव में कोई दिक्कत है, तो चुनाव आयोग इस पर फैसला करेगा। पहले इस फिल्म की रिलीज 5 अप्रैल तय की गई थी, लेकिन विवाद के बाद इसे 11 तारीख तक बढ़ा दिया गया था। इस फिल्म में विवेक ओबेराय ने मोदी का किरदार निभाया है।
सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहे राहुल- रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई। सीतारमण ने बताया, कांग्रेस ने कहा- चौकीदार ने चोरी की है। राहुल ने कहा कि कोर्ट ने मान लिया है कि नरेंद्र मोदी ने अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ दिए। मैं सवाल उठाना चाहती हूं कि हम सब जानते हैं कि राहुल गांधी कभी आधा पैराग्राफ नहीं पढ़ते और सिर्फ वही समझते हैं जो उन्हें बताया जाता है। कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा था। जो पार्टी इतने सालों तक सत्ता में रही अब वह कोर्ट के बयानों को भी गलत तरह से पेश कर रही। राहुल अपने बयानों को कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं।
केंद्र की दलील थी- दस्तावेज एक्ट के तहत सुरक्षित, आरटीआई के दायरे से बाहर
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने कहा था- जब हम केंद्र की आरंभिक आपत्ति पर फैसला कर लेंगे, तभी हम पुनर्विचार याचिकाओं के दूसरे पहलुओं पर विचार करेंगे। स्पष्ट कर दें कि हम केवल तभी दूसरी जानकारियों पर जाएंगे, जब हम केंद्र की आपत्ति को खारिज कर दें। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि कोई भी इन दस्तावेजों को बिना संबंधित विभाग की इजाजत के अदालत में पेश नहीं कर सकता। यह दस्तावेज ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत सुरक्षित रखे गए हैं और सेक्शन 8(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार के दायरे से भी बाहर हैं।
भूषण ने केंद्र की दलील पर आपत्ति जताई थी
पुनर्विचार याचिका के पक्ष में भूषण ने दलील दी थी- केंद्र की आपत्ति के संबंध में दलील बेहद अपुष्ट और दुर्भावनापूर्ण है। सरकार ऐसे दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा नहीं कर सकती है, जो पहले से ही प्रकाशित हो चुके हों और सामने आ चुके हों। धारा 123 के तहत केवल वही दस्तावेज सुरक्षित माने जाते हैं, जिनका प्रकाशन ना किया गया हो।
मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी इस्तेमाल की गई- वेणुगोपाल
इससे पहले वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा था- जिन दस्तावेजों के आधार पर यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण जांच की मांग करने वाली याचिकाओं को रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे थे, वह तीन मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी थी। यह बयान उन्होंने उस खबर के संंबंध में कहा था, जिनमें दस्तावेजोंके चोरी होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा था- विपक्ष यह दावा कर रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्रालय से दस्तावेजों के चोरी होने की बात कही गई, यह पूरी तरह गलत है। मैं यह कहना चाहता था कि याचिकाकर्ताओं ने मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपियों का इस्तेमाल किया था और यह दस्तावेज बेहद गोपनीय थे।
आयोग ने कहा, इनमें एनटीआर लक्ष्मी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्यमा सिंहम नाम की फिल्में शामिल हैं। इन्हें रचनात्मक कंटेंट कहा गया। लेकिन ऐसा भी कहा गया है कि इनसे सभी उम्मीदवारों और पार्टियों को बराबरी नहीं मिलेगी, जो कि आचार संहिता का उल्लंघन है। इसलिए आचार संहिता के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सिनेमा में इन फिल्मों का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए।
फिल्म के गाने का भाजपा के चुनाव प्रचार में हो रहा इस्तेमाल- याचिकाकर्ता
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था- इस फिल्म का एक गाना भाजपा के चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रेलर में कुछ ऐसे शॉट्स हैं जो वोटरों को प्रभावित करते हैं। इसमें चौकीदार कैंपेन को भी दिखाया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- दो मिनट के ट्रेलर से तय नहीं किया जा सकता कि यह वोटर्स को प्रभावित कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर छोड़ा था फैसला
शीर्ष अदालत ने कहा था- सेंसर बोर्ड ने अब तक इसे सर्टिफिकेट नहीं दिया है। फिल्म देखना उसका काम है। अगर इससे लोकसभा चुनाव में कोई दिक्कत है, तो चुनाव आयोग इस पर फैसला करेगा। पहले इस फिल्म की रिलीज 5 अप्रैल तय की गई थी, लेकिन विवाद के बाद इसे 11 तारीख तक बढ़ा दिया गया था। इस फिल्म में विवेक ओबेराय ने मोदी का किरदार निभाया है।
सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहे राहुल- रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई। सीतारमण ने बताया, कांग्रेस ने कहा- चौकीदार ने चोरी की है। राहुल ने कहा कि कोर्ट ने मान लिया है कि नरेंद्र मोदी ने अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ दिए। मैं सवाल उठाना चाहती हूं कि हम सब जानते हैं कि राहुल गांधी कभी आधा पैराग्राफ नहीं पढ़ते और सिर्फ वही समझते हैं जो उन्हें बताया जाता है। कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा था। जो पार्टी इतने सालों तक सत्ता में रही अब वह कोर्ट के बयानों को भी गलत तरह से पेश कर रही। राहुल अपने बयानों को कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं।
केंद्र की दलील थी- दस्तावेज एक्ट के तहत सुरक्षित, आरटीआई के दायरे से बाहर
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने कहा था- जब हम केंद्र की आरंभिक आपत्ति पर फैसला कर लेंगे, तभी हम पुनर्विचार याचिकाओं के दूसरे पहलुओं पर विचार करेंगे। स्पष्ट कर दें कि हम केवल तभी दूसरी जानकारियों पर जाएंगे, जब हम केंद्र की आपत्ति को खारिज कर दें। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि कोई भी इन दस्तावेजों को बिना संबंधित विभाग की इजाजत के अदालत में पेश नहीं कर सकता। यह दस्तावेज ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत सुरक्षित रखे गए हैं और सेक्शन 8(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार के दायरे से भी बाहर हैं।
भूषण ने केंद्र की दलील पर आपत्ति जताई थी
पुनर्विचार याचिका के पक्ष में भूषण ने दलील दी थी- केंद्र की आपत्ति के संबंध में दलील बेहद अपुष्ट और दुर्भावनापूर्ण है। सरकार ऐसे दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा नहीं कर सकती है, जो पहले से ही प्रकाशित हो चुके हों और सामने आ चुके हों। धारा 123 के तहत केवल वही दस्तावेज सुरक्षित माने जाते हैं, जिनका प्रकाशन ना किया गया हो।
मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी इस्तेमाल की गई- वेणुगोपाल
इससे पहले वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा था- जिन दस्तावेजों के आधार पर यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण जांच की मांग करने वाली याचिकाओं को रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे थे, वह तीन मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी थी। यह बयान उन्होंने उस खबर के संंबंध में कहा था, जिनमें दस्तावेजोंके चोरी होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा था- विपक्ष यह दावा कर रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्रालय से दस्तावेजों के चोरी होने की बात कही गई, यह पूरी तरह गलत है। मैं यह कहना चाहता था कि याचिकाकर्ताओं ने मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपियों का इस्तेमाल किया था और यह दस्तावेज बेहद गोपनीय थे।
Tuesday, April 2, 2019
为什么自然光对我们生活如此重要?
随着春回大地,漫长冬日的结束,北半球日照时间开始延长。灿烂的阳光也使许多人心情顿觉开朗,幸福感增多。
人人都知道阳光是世间万物生存的基本条件。但自然光的作用远不止这些,它对我们身心的影响和作用有些时候可能是你想不到的。
人体有生物钟早已是公认的科学事实。生物钟一天24小时控制和影响着我们的身体健康:从新陈代谢到睡眠休息等等。
虽然,人体生物钟没有外界的“提醒”也能照常运作(例如,科学家呆在没有自然光的洞穴中,他们体内的生物钟照常按24小时运作)。
然而,这不意味着自然光不起作用。实际上,人体对光线反应非常敏感。
自然光是一种重要的信号,它有助于启动人体内大量的生物功能。
中国有句古话叫睡不醒的冬三月。冬天日照时间短、天气寒冷。许多人总是觉得身体疲惫和睡眠不佳。
除了季节关系外,其实这里面最主要的原因是缺少阳光照射,会直接导致人体内褪黑素(melatonin)分泌不足,其结果是直接影响睡眠。
因此,自然光线除了有早晨把人们从沉睡中叫醒的功能,它其实还有助于人们夜间的睡眠。
因为如果白天能有一小时暴露在阳光下,将会启动你大脑并调整人体生物钟,帮助你晚上上床时增加睡意。
使用电脑、手机等电子设备已经成为人们日常工作和生活的一部分。
但是人们现在了解到这些荧屏所发出的蓝光会影响我们睡眠荷尔蒙的分泌,进而导致失眠。
所以,英国有关部门提醒和呼吁人们在晚上上床睡觉前,最好有一段时间不要接触蓝光,并把手机留在卧室以外。
光线影响心情
自然光线还可以改善人们的心情,让人感到更快乐。
这是因为当阳光通过视神经进入大脑后,人体感受到了阳光,使能给人们带来满足感的化学物质血清素水平随之增加。因此让人心情改善。
反之,经常倒班的人由于阳光不足有可能会导致心情沮丧甚至抑郁。
此外,有一种精神疾病直接与日照时间有关。这种情况叫季节性情感障碍(Seasonal Affective Disorder,SAD)。
有这种疾病的人随着秋天到来,日照时间越来越短,他们就会出现抑郁症状。
目前的一种理论认为这是由于日照时间减少,人体的生物钟开始出现紊乱所导致的。
治疗该病的一种办法是用模仿自然光的一种灯,只要早上照射30分钟就能调整你的生物钟,改善心情。
阳光充足骨质强
维生素D对人体非常重要,它可以帮助我们身体从饮食中吸收钙和磷酸盐。这些矿物质对人体拥有健康的骨骼、牙齿和肌肉至关重要。
如果缺乏维生素D可导致软骨病以及骨骼畸形等。
因此,维生素D也被称为“阳光维生素”。幸运的是,我们几乎可以从阳光中吸收我们人体所需要的所有维生素D。
当阳光直射到我们的皮肤上时,我们大多数人都会通过这种方式获得所需的维生素D。
当然,长时间暴晒在阳光下有其危险性,因此要注意防晒,比如使用防晒霜或是在一天当中最热的时段避免直接晒太阳。
人人都知道阳光是世间万物生存的基本条件。但自然光的作用远不止这些,它对我们身心的影响和作用有些时候可能是你想不到的。
人体有生物钟早已是公认的科学事实。生物钟一天24小时控制和影响着我们的身体健康:从新陈代谢到睡眠休息等等。
虽然,人体生物钟没有外界的“提醒”也能照常运作(例如,科学家呆在没有自然光的洞穴中,他们体内的生物钟照常按24小时运作)。
然而,这不意味着自然光不起作用。实际上,人体对光线反应非常敏感。
自然光是一种重要的信号,它有助于启动人体内大量的生物功能。
中国有句古话叫睡不醒的冬三月。冬天日照时间短、天气寒冷。许多人总是觉得身体疲惫和睡眠不佳。
除了季节关系外,其实这里面最主要的原因是缺少阳光照射,会直接导致人体内褪黑素(melatonin)分泌不足,其结果是直接影响睡眠。
因此,自然光线除了有早晨把人们从沉睡中叫醒的功能,它其实还有助于人们夜间的睡眠。
因为如果白天能有一小时暴露在阳光下,将会启动你大脑并调整人体生物钟,帮助你晚上上床时增加睡意。
使用电脑、手机等电子设备已经成为人们日常工作和生活的一部分。
但是人们现在了解到这些荧屏所发出的蓝光会影响我们睡眠荷尔蒙的分泌,进而导致失眠。
所以,英国有关部门提醒和呼吁人们在晚上上床睡觉前,最好有一段时间不要接触蓝光,并把手机留在卧室以外。
光线影响心情
自然光线还可以改善人们的心情,让人感到更快乐。
这是因为当阳光通过视神经进入大脑后,人体感受到了阳光,使能给人们带来满足感的化学物质血清素水平随之增加。因此让人心情改善。
反之,经常倒班的人由于阳光不足有可能会导致心情沮丧甚至抑郁。
此外,有一种精神疾病直接与日照时间有关。这种情况叫季节性情感障碍(Seasonal Affective Disorder,SAD)。
有这种疾病的人随着秋天到来,日照时间越来越短,他们就会出现抑郁症状。
目前的一种理论认为这是由于日照时间减少,人体的生物钟开始出现紊乱所导致的。
治疗该病的一种办法是用模仿自然光的一种灯,只要早上照射30分钟就能调整你的生物钟,改善心情。
阳光充足骨质强
维生素D对人体非常重要,它可以帮助我们身体从饮食中吸收钙和磷酸盐。这些矿物质对人体拥有健康的骨骼、牙齿和肌肉至关重要。
如果缺乏维生素D可导致软骨病以及骨骼畸形等。
因此,维生素D也被称为“阳光维生素”。幸运的是,我们几乎可以从阳光中吸收我们人体所需要的所有维生素D。
当阳光直射到我们的皮肤上时,我们大多数人都会通过这种方式获得所需的维生素D。
当然,长时间暴晒在阳光下有其危险性,因此要注意防晒,比如使用防晒霜或是在一天当中最热的时段避免直接晒太阳。
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